साहित्य

भारतीय सेना दिवस

दिनेश पाल सिंह दिलकश

सीमा पर जागकर जो रातों को दिन बना देते हैं,
वे अपने सुख छोड़ भारत का भाग्य जगा देते हैं।

वर्दी में लिपटा साहस, मौन होकर बोल जाता है,
जब देश पुकारे संकट में, प्राणों का मोल जाता है।

माँ की ममता छूट जाती, घर–आँगन पीछे रह जाए,
पर तिरंगा जब लहराए, हर बलिदान अर्थ पाए।

बर्फ़, रेगिस्तान, जंगल—हर पथ उनका परिचय है,
भारतीय सेना का नाम ही राष्ट्र का कवच है।

हर शहीद की चुप्पी में, इतिहास बोल उठता है,
उस रक्त से ही भारत का भविष्य सशक्त होता है।

भारतीय सेना दिवस पर नमन, यह राष्ट्र का अभिमान है,
सेना रहे तो देश सुरक्षित, यही भारत की पहचान है।

दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश

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