
पीली धूप, पीले सपने,
धरती ने मुस्कान ओढ़ी।
शीत विदा ले चुपचाप गया,
नव ऋतु ने आशा जोड़ी॥
सरसों हँसी खेतों में,
कोयल ने सुर साधे।
आम्र-कली ने कहा प्रकृति से—
अब जीवन को आगे बढ़ा ले॥
बसंत पंचमी केवल रंग नहीं,
यह ज्ञान-ज्योति का संदेश।
सरस्वती जब मन में बसती,
तब मिटता अज्ञान-अवशेष॥
कलम चले, विचार जगे,
संवेदना बने पहचान।
विद्या से ही बदले समाज,
यही बसंत का सच्चा मान॥
हर घर पहुँचे ज्ञान-प्रकाश,
हर मन में जागे विवेक।
तभी सजेगा मानव-जीवन,
तभी बनेगा नव-एक॥
डॉ सुरेश जांगडा
राजकीय महाविद्यालय सांपला, रोहतक (हरियाणा)




