साहित्य

चित्रकूट की भूमि को

ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति

 

चित्रकूट की भूमि को, करिये आप प्रणाम l
करें राम का ध्यान तो, बनता है सब काम ll

प्यारा दशरथ कुंड है, नित कर उसमें स्नान l
तब तो होगा आप का,’ईश्वर’ अति कल्यान ll

कामद गिरि की परिक्रमा, जो करता है नित्य l
‘ईश्वर’ वह चमका किया,ज्यों जग में आदित्य ll

कोटि तीर्थ सबसे बड़ा, देता है संदेश l
यहाँ करे नित स्नान जो,मिट जाता है क्लेश ll

रामघाट में राम जी,नित करते थे स्नान l
‘ईश्वर’ जो वैसा करे, पायेगा सम्मान ll
.
यहाँ गुप्त गोदावरी, खोल रही है भाग्य l
‘ईश्वर’ दर्शन पान से, बढ़ता है सौभाग्य ll

बालमीकि आश्रम अहो, मन लेता है मोह l
जीवजंतु मिलकर रहें, करें न कोई द्रोह ll

अद्भुत है देवांगना, दर्शन करिये आप l
कुछ भी पाने के लिए, करिये पूजा जाप ll

भरतकूप का जल पियें,लेकर उनका नाम l
‘ईश्वर’ वैसा फल मिले, जैसे चारोधाम ll

पुष्करिणी है तारती, जो बोले जय राम l
‘ईश्वर’ तू नित राम जप, होगा तेरा नाम ll

ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति l

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