साहित्य

गीत- अवध में आए रघुराई

मुल्क राज "आकाश"

 

अवध में आए हैं रघुराई
आई हैं मेरी जानकी मइया
आए हैं लक्ष्मण भाई

नील नल और जावंत आए
अंगद सुग्रीव हनुमान लाए
राजा विभीषण साथ पधारे
रसम विदा की निभाई
अवध………….

ढोल नगाड़े मृदंग बाजे
घर आंगन सब जन के साजे
माथे चंदन तिलक विराजे
राह फूलों से सजाई
अवध…………

देवी देवता फूल बरसाए
ब्रह्मा शिव देख मुस्काए
मंगल गीत जन जन गाए
मेरे प्रभु ने रीत निभाई
अवध………………..

माता तीनों राह ताकत है
शत्रु भरत राह झांकत है
त्रिलोकी के नाथ आवत है
राह में देर कहां लगाई
अवध ……………..

उत्सव आज अवध में भारी
झूमा अवध का नर और नारी
राजतिलक श्री राम का होना
वशिष्ठ गुरु मुकुट हैं सजाई
अवध…………….

सिंहासन पर राम बिराजे
संग में रानी सीता साजे
जय जय राम की ध्वनि गूंजी
राजा राम ने वचन निभाई
अवध……………

मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद
उत्तर प्रदेश
@mulakraj akash
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