साहित्य

वतन की बेटियाँ

मोहिनी गुप्ता

 

हम
वतन की बेटियाँ,
जानती है फर्ज़ निभाना !

हम
फौलाद- सी मज़बूत ,
जानती है छक्के छुड़ाना !

हम
मुश्किल घड़ी में,
जानती है निभाना !

हम
नहीं किसी से कम,
और न ही कम आंकना !

हम
रखती सदा मेलजोल संग,
वसुधैव कुटुंबकम सद्भावना !

हम
वतन की बेटियाँ,
जानती है फर्ज़ निभाना !
©®मोहिनी गुप्ता राजगढ़ मध्य प्रदेश

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