
नफ़रतों से रिश्ता नाता छोड़ दें।
इस तरह लड़ना लड़ाना छोड़ दें।
इतना कोई है नहीं अब नासमझ,
ये सियासत सातिराना छोड़ दें।
दोस्त दुश्मन सबकी गर्दन काटती,
रार की तलवार होना छोड़ दें।
इसका उसका मेरा सबका है वतन,
बाँटने की आप मंशा छोड़ दें।
रास्ते की मुश्क़िलों से जो डरें,
अपनी मंज़िल का इरादा छोड़ दें।
जाते संसद चोर उचक्के जीतकर,
क्या करें हम वोट देना छोड़ दें।
इस जहाँ में गर तरक्की चाहते,
राह *अम्बुज* दासता का छोड़ दें।
चनरेज राम अम्बुज




