
कहते हैं हर जीत का कारण होते हैं पुरुष,
जैसे श्री राम ने जीती थी रामायण,
जैसे महाभारत के योद्धा थे पांडु,
जैसे लक्ष्मण ने मारा था इंद्रजीत को,
पर सोचा कभी आपने??
अगर न होती सीता, तो क्या बनती रामायण?
अगर न हुआ होता चीरहरण द्रौपदी का, तो क्या होती महाभारत?
अगर न होता सीता का हरण, तो क्या इंद्रजीत का होता समापन?
अगर न होती भाव में नारी, तो क्या होते आप?
अगर न होती भाव में नारी, तो क्या होते आप?
न नारी करना चाहती है मुक़ाबला आपसे,
न जीतना है उन्हें ये भाग-दौड़ में आपसे,
चाहते इतना ही हैं वो आपसे कि दें आप उन्हें वो इज़्ज़त जो दी जाती है पुरुष को…
चाहते इतना ही हैं वो आपसे कि न मारा जाए बेटियों को कोख में ही…
चाहते इतना ही हैं वो आपसे कि न आगे आपसे, न पीछे, आपके कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें इस समाज के साथ में…
रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ ( माध्य प्रदेश)




