साहित्य

हिन्दी

निवेदिता सिन्हा

 

हिन्द की बेटी हैं हिन्दी,
है भारत माँ  के माथे  की बिन्दी ।
है ये राष्ट्रभाषा हमारी
भिन्न- भिन्न  धर्मो को एक सूत्र में पिरोती,
भावनाओं के संचार का माध्यम बनती ,
है  ये जन जन को प्यारी ।
पर आज अंग्रेजी है सौतन बन,
घर इसके  घुस आई ।
अंग्रेजी बोलने का चल पड़ा फैशन ।
आज हिन्दी के घर,
अधिकार जमा बैठी इसकी सौतन ।
साल में एक बार “हिन्दी दिवस” हम मना लेते।
कल से फिर अंग्रेजी में हाय हैलो की रट लगा देते ।
क्यों नहीं बदलती हमारी मानसिकता ?
माना अंग्रेजी है अन्तरराष्ट्रीय भाषा
पर हिन्द में इसका नम्बर ,
हिन्दी के बाद ही आता ।
हिन्दी बोल करें गर्व  ,
इसे कभी ना समझे  अंग्रेजी से तुच्छ हम ।
ये हमारी है अपनी संस्कृति
सदियों से साथ सफर है करती।
है ये तो बिलकुल अपनी ‘
अगर करते  हैं अपने देश को प्यार हम,
तो हिन्दीं को दे सभी भाषाओं के शिखर में
सर्वश्रेष्ठ  स्थान   हम ।

निवेदिता सिन्हा , गया जी (बिहार)

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