
“”तीन रंग का झंडा मेरा,
बाईसवीं तक भाषा,
पंच हजारा बोली -ठोली,
एकहि है अभिलाषा,
लोक तंत्र कायम रहे,
हिन्दी भी आबाद रहे।।
डॉ नवीन मौर्या “फायर बनारसी ” काशी।

“”तीन रंग का झंडा मेरा,
बाईसवीं तक भाषा,
पंच हजारा बोली -ठोली,
एकहि है अभिलाषा,
लोक तंत्र कायम रहे,
हिन्दी भी आबाद रहे।।
डॉ नवीन मौर्या “फायर बनारसी ” काशी।