साहित्य

हसरत

धीरज कुमार शुक्ला 'फाल्गुन'

लिखूॅं,
की मोहब्बत है उनसे,
और,
हसरत है उन्हें पाने की,
की जब से हुई है,
मोहब्बत उनसे,
फ़िक्र नहीं है ज़माने की,
बहते हैं ऑंसू,
तड़प रही रूह,
यही तो चाहत है,
मोहब्बत के आजमाने की,
लफ़्ज़ों में यकीं,
इबादत वफ़ा की,
और कह रही बस,
नज़ाकत शमां की,
की जलते हैं परवाने,
और,
मोहब्बत के दीवाने,
लेकर,
हसरतें मन में,
रह जाती जो बाकी,
हसरत,
सिर्फ उन्हें पाने की,

कवि,लेखक, गीतकार,साहित्यकार:-
धीरज कुमार शुक्ला’फाल्गुन’
ग्राम-पिपलाज,तहसील-खानपुर,
जिला-झालावाड़ ,राजस्थान (३२६०३८)

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