इंकलाब पब्लिकेशन द्वारा डॉ. रामशंकर ‘चंचल’ को ‘आदिवासी सृजन मसीहा’ सम्मान

मुंबई। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में आदिवासी जनजीवन और संस्कृति को केंद्र में रखकर सशक्त रचनात्मक योगदान देने वाले प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. रामशंकर ‘चंचल’ को इंकलाब पब्लिकेशन, मुंबई द्वारा विशेष हिंदी साहित्य सम्मान ‘आदिवासी सृजन मसीहा’ से अलंकृत किया गया।

यह सम्मान उन्हें उनकी महत्वपूर्ण कृति ‘आदिवासी जन जीवन और संस्कृति’ (आलेख संग्रह) के लिए प्रदान किया गया है।
इंकलाब पब्लिकेशन की ओर से जारी सम्मान-पत्र में कहा गया है कि डॉ. चंचल ने अपनी लेखनी के माध्यम से आदिवासी समाज के जीवन, परंपराओं, संघर्षों और सांस्कृतिक चेतना को अत्यंत संवेदनशीलता, प्रामाणिकता और साहित्यिक गरिमा के साथ प्रस्तुत किया है। उनकी रचना केवल साहित्यिक दस्तावेज नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आत्मा और सामाजिक यथार्थ का सजीव प्रतिबिंब है। सम्मान-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. रामशंकर ‘चंचल’ की सशक्त लेखनी हिंदी साहित्य को नई दिशा और नई ऊँचाइयाँ प्रदान करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उनकी रचनाएँ पाठकों में सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक सम्मान और मानवीय संवेदना को मजबूत करती हैं।
इस अवसर पर इंकलाब पब्लिकेशन ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. चंचल का साहित्यिक अवदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा और आदिवासी साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाएगा। यह सम्मान 27 जनवरी 2026 को प्रदान किया गया। साहित्य जगत, पाठकों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रचनाकारों ने डॉ. रामशंकर ‘चंचल’ को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए इसे आदिवासी साहित्य के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया है।



