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डॉ. रामशंकर चंचल को ‘श्री मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’-हिंदी साहित्य के लिए गौरवपूर्ण क्षण

मुंबई। हिंदी साहित्य के समकालीन परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रामशंकर चंचल को प्रतिष्ठित ‘श्री मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान उन्हें इंकलाब पब्लिकेशन, मुंबई द्वारा प्रकाशित उनकी चर्चित कृति ‘वह लड़की याद आती है’ (आंचलिक खंड काव्य) के लिए प्रदान किया गया। यह कृति न केवल साहित्यिक सौंदर्य से समृद्ध है, बल्कि भारतीय ग्रामीण चेतना, स्मृतियों और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज भी मानी जा रही है।
इंकलाब पब्लिकेशन द्वारा जारी सम्मान-पत्र में उल्लेख किया गया है कि डॉ. रामशंकर चंचल की यह रचना हिंदी काव्य परंपरा में एक सशक्त हस्तक्षेप है। आंचलिक जीवन की सुगंध, लोक-भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति और स्मृति-तत्व की गहरी मार्मिकता इस काव्य को विशिष्ट बनाती है। ‘वह लड़की याद आती है’ केवल एक काव्य-रचना नहीं, बल्कि समय, समाज और मनुष्य के भीतर बसे भावलोक का संवेदनशील चित्रण है, जो पाठक के मन में देर तक गूंजता रहता है।
सम्मान-पत्र में यह भी कहा गया है कि डॉ. चंचल की लेखनी हिंदी साहित्य को नई दिशा और नई ऊँचाइयाँ प्रदान करने में सक्षम है। उनकी रचनात्मक दृष्टि, भाषा पर पकड़ और भावनात्मक गहराई उन्हें समकालीन साहित्यकारों में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। इंकलाब पब्लिकेशन ने विश्वास व्यक्त किया है कि भविष्य में भी उनकी रचनाएँ हिंदी साहित्य को समृद्ध करती रहेंगी और नई पीढ़ी के रचनाकारों को प्रेरणा देंगी।
गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 2026 के पावन अवसर पर प्रदत्त यह सम्मान साहित्यिक जगत के लिए विशेष महत्व रखता है। यह न केवल डॉ. रामशंकर चंचल की साधना और साहित्यिक तपस्या का सम्मान है, बल्कि हिंदी साहित्य की सृजनात्मक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले प्रयासों की भी स्वीकृति है।
इस अवसर पर देशभर के साहित्यकारों, पाठकों और आलोचकों ने डॉ. रामशंकर चंचल को बधाइयाँ प्रेषित कीं और इसे हिंदी साहित्य के लिए एक प्रेरक क्षण बताया। निस्संदेह, ‘श्री मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ से अलंकृत होकर डॉ. रामशंकर चंचल ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची संवेदना, ईमानदार अभिव्यक्ति और निरंतर साधना से साहित्य आज भी समाज की आत्मा को स्पर्श कर सकता है।

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