साहित्य

इंतजार

नीतू रवि गर्ग "कमलिनी"

जीवन के सफर में मिले अनेक दोस्त,
कुछ बिछड़ गए तो कुछ ने दिया साथ,
जो बिछड़ गये मिलने को है दिल बेताब,
जाने कहां गए तुम ओ मेरे यार,
करता रहेगा दिल तुम्हारा जिंदगी भर इंतजार।

जब याद तुम्हारी आती है,
दिल में एक बेचैनी सी होती है,
कहां होगे,कैसे होंगे,कभी मिलेंगे कि नहीं,
एक सवाल खड़ा कर जाती,फिर भी ऐ दोस्त,
करता रहेगा दिल तुम्हारा जिंदगी भर इंतजार।

तुमको देखने,मिलने को दिल तड़प उठता,
फेसबुक ने भी मिलाया है बहुत से दोस्तों को,
जो मिल नहीं पाए,उनको ढूंढता है दिल बार-बार,
जाने किस मोड़ पर मिलोगे,पूछता है दिल बार बार,
करता रहेगा दिल तुम्हारा जिंदगी भर इंतजार।

करता है दिल बस यही दुआ,
जहां भी हो,जैसे भी हो,खुश रहो मेरे दोस्तों,
कभी याद हमारी सताये,तो लौट आना मेरे दोस्तों,
जीएंगे वे लम्हें जो छोड़ आये बचपन की गलियों में,
करता रहेगा दिल तुम्हारा जिंदगी भर इंतजार।

नीतू रवि गर्ग “कमलिनी”
चरथावल मुजफ्फरनगर उत्तरप्रदेश

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