
आपाधापी में गया, जीवन का आनंद।
खुशियों में वीरानियत, बुद्धि दिख रही मंद।।
बुद्धि दिख रही मंद, पुहुप का खिलना मुश्किल।
मन अधीर बेचैन, दूर लगती है मंजिल।।
कहें’ मधुर’ कविराय, हर समय चिंता व्यापी।
दर्द दे रहा नित्य,रोज की आपाधापी।।
जीवन उपवन में खिले, तभी महकते फूल।
जब समरसता प्यार हो, जीवन के अनुकूल।।
जीवन के अनुकूल, भाग्य के उडगन चमके।
ऊँचा रहे ललाट, भानु सम प्राची दमके।।
कहें’ मधुर’ कविराय, सुखी होंगे जब सब जन।
तब होगा उत्थान, कुसुममय जीवन उपवन।।
ब्रह्मनाथ पाण्डेय’ मधुर’
वार्ड नंबर-5 काॅंटी, मुहल्ला- ककटही, नगर पंचायत- मेंहदावल, जिला- संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश, 272271
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