साहित्य

कनक

मुझको यारों गुनहगारों से

मुझको यारों गुनहगारों से मिलाया मत करो
करते गुनाह कातिलाना फ़िर झुकाया मत करो।।//१//

ऐसे लोगों को कभी भी पास लाना है बुरा
नफ़रत का अड़ंगा कभी आजमाया मत करो।।//२//

देखकर के वो नज़ाकत फ़िर नसीहत देते हैं
ऐसे नाज़ुक रिश्तों को तुम भी भुलाया मत करो।।//३//

दिल लगाना चाहिए अब जिन्दगी में रौशनी
देखकर उस कली को तुम जलाया मत करो।।//४//

देख उसको हलक सूखा हैं हमारा आज तो
रात गुजरे कब से निकले दिल पिलाया मत करो।।//५//

ताज़मीन

घुटता हैं दम मेरा मन भी यार घबराता है
मुझको इतने सारे लोगों से मिलाया मत करो।।//६//

मकता

कैसे कोई हमको छू भी तो सके ना दिल कनक
करके हम पे यार अहसा तुम जताया मत करो।।

कनक

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