साहित्य

कुण्डलिया छ्न्द मकर संक्रांति एवं पोंगल

लक्ष्मण लड़ीवाला 'रामानुज'

उत्तरायण सूर्य (मकर संक्रांति एवं पोंगल पर्व) पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं । 
मकर संक्रांति पर्व पर, भूले सब अवसाद,
सत्य सनातन पर्व यह, बाटें खूब प्रसाद ।

सूर्य उत्तरायण हुआ, बदली अपनी चाल ।
सभी सनातन मानते, ऋतु परिवर्तन काल।।
ऋतु परिवर्तन काल, गगन में सूर्य चमकता ।
यही संक्रांति पर्व, सूर्य जब दिशा बदलता ।।
माघ स्नान के संग, करे धार्मिक पारायण ।
आता है यह पर्व, हुआ सूर्य उत्तरायण ।।
(2)
ठण्डक गुनगन धूप में, मकर संक्रांति पर्व
चरखी पकड़े राधिका, करे कृष्ण पर गर्व
करे कृष्ण पर गर्व, डोर पतंग को साधे
ठण्डक चूनर ओढ़, कहे फिर राधे राधे ।
लेती डोर लपेट, बने पतंग तब बंधक
बस में राधे कृष्ण, भक्त को कैसी ठण्डक ।

– लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’

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