आलेख

लाल बहादुर शास्त्री- भारत की माटी के बहादुर लाल

आकाश शर्मा आज़ाद

भारत की माटी के लाल, लाल बहादुर शास्त्री का जन्म, 2, अक्टूबर सन 1904 को,, मुगलसराय मे हुआ था !! लाल बहादुर शास्त्री जी के पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव,
तथा माता जी का नाम रामदुलारी देवी था !! लाल बहादुर शास्त्री जी के पिता श्री,,एक शिक्षक थे,, और उन्होंने राजस्व विभाग में क्लर्क का भी कार्य किया !! शास्त्री जी की माता जी रामदुलारी देवी स्वयं एक शिक्षित महिला थी,, लाल बहादुर शास्त्री जी जब केवल डेढ़ साल के थे,, तब उनके पिता श्री,शारदा प्रसाद श्रीवास्तव का निधन हो,, था !!
शास्त्री जी के पिता के निधन के बाद उनकी माता श्री,,
रामदुलारी देवी जी ने, अपने बच्चों का पालन- पोषण किया लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुगलसराय और वाराणसी से प्राप्त की, जहाँ उन्होंने हरिश्चंद्र हाई स्कूल और बाद में काशी विद्यापीठ से पढ़ाई की, जहाँ उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली। लाल बहादुर शास्त्री जी ने दर्शनशास्त्र और नैतिकता में,स्नातक की डिग्री प्राप्त की,,
लाल बहादुर शास्त्री जी की शादी,16 मई 1928 को, ललिता देवी, से, हुई थी !! लाल बहादुर शास्त्री भारत के …असहयोग आंदोलन (1921) में लाल बहादुर शास्त्री का योगदान था कि केवल 16 साल की उम्र में उन्होंने गांधीजी के आह्वान पर अपनी पढ़ाई छोड़ दी और आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा, नमक सत्याग्रह: (1930) में लाल बहादुर शास्त्री का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था; उन्होंने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, ब्रिटिश नमक कानून तोड़ने के लिए लोगों को प्रेरित किया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और ढाई साल जेल में बिताने पड़े, भारत छोड़ो आंदोलन: भारत छोड़ो आंदोलन में शास्त्री जी ने अभूतपूर्व योगदान दिया l 9 अगस्त 1942 के दिन शास्त्रीजी ने इलाहाबाद पहुँचकर अगस्त क्रान्ति की दावानल को पूरे देश में प्रचण्ड रूप दे दिया। पूरे ग्यारह दिन तक भूमिगत रहते हुए यह आन्दोलन चलाने के बाद 19 अगस्त 1942 को शास्त्री जी गिरफ्तार हो गये। सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) में लाल बहादुर शास्त्री का महत्वपूर्ण योगदान था; उन्होंने दांडी मार्च में सक्रिय भाग लिया, ब्रिटिश कानूनों का उल्लंघन किया, जिसके लिए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा, जिससे उनका दृढ़ संकल्प और भी मजबूत हुआ और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिका स्थापित की, जो गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित था ! आजादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री का सफर उत्तर प्रदेश में मंत्री (पुलिस और परिवहन) से शुरू हुआ, जहाँ उन्होंने महिला कंडक्टरों की नियुक्ति और भीड़ नियंत्रण के लिए पानी की बौछार जैसे सुधार किए; फिर वे केंद्र में आए, नेहरू के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री और गृह मंत्री बने; और अंततः 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया और 1965 भारत -पाकिस्तान युद्ध में श्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारत का सफल विजय नेतृत्व किया तथा ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए,
ताशकंद समझौता- ताशकंद समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 1966 में किया गया एक शांति समझौता था। इसके अनुसार, भारत और पाकिस्तान अपनी शक्ति का प्रयोग एक-दूसरे के खिलाफ नहीं करेंगे और अपने झगड़ों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करेंगे।ताशकंद समझौते की फाइल पर साइन किए …लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु 11 जनवरी, 1966 को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में हुई, आधिकारिक तौर पर दिल का दौरा (हार्ट अटैक) बताया गया, परंतु लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु पर, प्रश्न आज भी उठाते रहते हैं,
कई विद्वान शास्त्री जी की मृत्यु को, एक बड़ा षड्यंत्र मानते
हैं,, लाल बहादुर शास्त्री, भारत गणराज्य के पूर्व प्रधानमंत्री
एक सादा जीवन, और ऊंचे विचार रखने वाले, महानायक थे ! 1965 की जंग में जब अमेरिका ने भारत को गेहूँ रोकने की धमकी दी, तब शास्त्री जी ने देशवासियों से कहा कि हफ़्ते में एक दिन एक वक्त भोजन न करें। श्री लाल बहादुर शास्त्री स्वयं भी अपने नियम का पालन किया! और भारतीय जवानों और किसानों को, प्रेरित करने के लिए,
जय जवान- जय किसान का नारा उस महानायक ने दिया
ऐसे भारत के महानायक भारत के बहादुर लाल को,,
मैं, (कवि आकाश शर्मा आज़ाद )करता हूं अपनी कलम के,
श्रद्धा सुमन अर्पित!

आकाश शर्मा आज़ाद

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