साहित्य

बसंत श्रीवास वसंत

महागौरी अष्टकम

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

अष्ट नवरात्रि शक्ति माँ आराधना।
पूजे माँ को, जगत विविध प्रकार।।
सुख संपत्ति, हो पूर्ण मनोकामना।
हरती कष्ट मां करती सदा उपकार।।

पति रूप में, पाने  शिव को भवानी।
घोर तप से,तन काली पड़ जाती है।।
प्रशन्न हो शिव सह गंग स्नान से माँ।
श्वेतवर्ण होकर महागौरी कहलाती है।।

अष्टरूप वृषारुणी महागौरी हो माता।
चतुर्भुजी,हस्त,त्रिशूल डमरूधारी हैं।।
चुनरी,कुमकुम,रक्तपुष्प,व नारियल।
कन्यारूपी माँ को भेंट लगे प्यारी है।।

मोक्ष दायिनी है माँ शक्ति, स्वरूपा।
द्वितीय नाम माँ शाम्भवी कहलाती है ।।
अष्टशक्ति माता की पूजा साधना में ।
चना,पूरी, हलवा नैवेद्य मन भाती है ।।

शुम्भ-निशुम्भ असुर संघारी मैय्या।
सुर-संत,नर मुनि जन पूजे संसार।।
सुख संपति मनवांछित फल पावै।
जो भक्त करे माँकी जय जयकार।।

बसंत श्रीवास वसंत(नरगोड़ा)
रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर
छत्तीसगढ़

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