साहित्य

माँ

ब्रह्मनाथ पाण्डेय' मधुर'

जीवन का आधार जगत में,केवल माँ की गोद।
उसके ऑंचल में पलता है, जनम- जनम का मोद।।
दूध पिलाकर जीवन देती, सदा दिखाती प्रेम।
उसके सिवा दूसरा कब है, जो पूछे नित क्षेम।।1।।

वह सागर का रूप अनोखा, लहरें उठे हजार।
वह उपवन में खिली सुमन है, महकाये घरबार।।
वह देवी है वह लक्ष्मी है,वह वाणी की बोल।
सत्य रूप में वही सनातन, देती है रस घोल।।2।।

ब्रह्मनाथ पाण्डेय’ मधुर’
वार्ड नंबर-5 काॅंटी, मुहल्ला- ककटही, नगर पंचायत- मेंहदावल, पोस्ट- मेंहदावल जिला- संत कबीर नगर , उत्तर प्रदेश 272271

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