साहित्य

मीनाक्षी की कलम से स्वरचित कविता

लोहड़ी और मकर संक्रांति

मीनाक्षी की

लोहड़ी की अग्नि में मैने चिंताओं को जलाया ।।

रोग शोक को दूर भगाया ।।
……
रेवड़ी की मिठास मूंगफली की गर्मी !!

नूतन वर्ष में रहे न कोई कमी !!
….
आ गया अब संक्रांति का त्योहार !!

मन में आए नई बहार !!
….
पतंग की डोर ली अपने हाथ में !!

अपनी डोर दी शिवशक्ति के हाथ में !!
….
अपनी पतंग करे सूर्य नमस्कार !!
प्रकट करे शिवशक्ति का आभार !!
…..
पतंग ने शिक्षा ली है निर्भयता की !!

पतंग भी जी रही जिंदगी अनुभव की !!
…..
कटने के डर से उड़ना छोड़ती नहीं !!

परख के हवाओं का रुख,
मुड़ जाती है वही ।
….
मैं और मेरी पतंग ,
आसमान में रंगीली गंगा की महसूस कर रहे थे क्रांति !!

इस तरह मनाई मीनाक्षी ने लोहड़ी और मकर संक्रांति !!

मीनाक्षी महाजन पठानकोट पंजाब

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