
ऋ से रख सम्मान ऋषि का
निज जीवन धन्य करो
ए से एकाग्रता लाकर
संशय मन में न भरों।
ऐ से ऐं नम: कहकर तब
विद्या माॅं से पाओ,
ओ से ओम जपते जपते
संस्कार अपनाओ।
औ से और हमेशा करके
पथ पर न अपने रुको,
लेने को आशीष बड़ों का
आगे उनके झुको।
अं से अंगों की रक्षा कर
अ: से तुम अखंड रहो
कष्ट चाहे अपने ,गैरों के
मत उनको कभी सहो।
मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदोसी
मो०- 8433013409
दिनांक- 23-1-2026




