
संपूर्ण विश्व दो गोलार्ध में स्थित है – उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध। भारतवर्ष उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। अतः भारतीय संस्कृति में मकर संक्रान्ति का अत्यंत महत्व है। मकर संक्रान्ति के दिन हम सूर्य देव की उपासना करते हैं।
सूर्य देव बारह स्वरूप धारण करके बारह महीनो में बारह राशियों का संक्रमण करते हैं. इस कारण ही संक्रांतियां होती हैं। विभिन्न राशियों में सूर्य के प्रवेश को विविध नामों से जाना जाता है। इसी प्रकार जब सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रान्ति होती है।
समस्त संक्रांतियों में मकर संक्रान्ति का विशेष महत्व होता है, क्योंकि तब सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, और उत्तरायण कितना महत्व रखता है, इसका उदाहरण महाभारत काल से लिया जा सकता है, जब कौरव पांडव युद्ध के दौरान भीष्म पितामह घायल होकर वाणों की शैय्या पर लेटे हुए अपनी मृत्यु का इन्तजार कर रहे थे। भीष्म इसी मकर संक्रान्ति का इन्तजार कर रहे थे कि जब सूर्य उत्तरायण होंगे तभी वह प्राण त्याग करेंगे।
सूर्य का मकर में प्रवेश मकर संक्रान्ति के रूप में पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है। इस दिन स्नान, दान और सूर्योपासना का विशेष महत्व है।
मकर संक्रांति से ही दिन के समय में बढ़ोतरी होने लगती है इसलिए भारतीय ज्योतिष के गणना के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही बड़ा दिन शुरू होता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर प्रस्थान करता है और ठिठुरते शीत पर पर धूप की विजय यात्रा प्रारंभ हो जाती है।
मकर संक्रांति का त्योहार भारतवर्ष में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व कहते हैं। मकर संक्रांति के मौके पर गंगा यमुना या पवित्र सरोवर और नदियों में स्नान करके तिल गुड़ खाने की परंपरा है। साथ ही कतिपय स्थानों में पतंगबाजी भी खूब होती है। उत्तर भारत में यह त्यौहार खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है मकर संक्रांति को असम में भोगाली बिहू तो तमिल में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। सुख संपत्ति तथा संतान की कामना हेतु मनाया जाने वाला तमिलनाडु का त्योहार पोंगल मकर संक्रांति का ही प्रतीक है। लोगों के सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ पारंपरिक रूप से जुड़ा हुआ त्यौहार पोंगल है जिसे चेन्नई तमिलनाडु के सभी वर्ग के लोग धूमधाम से मनाते हैं।
कुल मिलाकर मकर संक्रांति का पर्व सम्पूर्ण भारत को एकता के सूत्र में बांधता हुआ नजर आता है। सूर्योपासना का यह पर्व समस्त लोगों के लिए मंगलकारी हो।
✍️ नरेश चन्द्र उनियाल,
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।



