
मुर्गी
मुर्गी रोज दाना चुगती
अपने चूजे के साथ रहती
चूजे खूब मस्ती करते
इधर-उधर दौड़ करते
मुर्गी रोज चूजों से कहती
मैं किसी से नहीं डरती
एकदिन बिल्ली मौसी आई
सारे चूजों में डर समाई
मुर्गी बोली डरो नहीं प्यारे
आओ पंखों में छिपो प्यारे
……
जयचन्द प्रजापति जय
प्रयागराज




