
आज़ादी की लड़ाई को नई ऊर्जा
देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस
की आज 128वीं जन्म जयंती है,
नेताजी को विनम्र श्रद्धांजलि है।
आजादी के बाद फ़िल्म समाधि बनी,
नेताजी के रूप में अभिनेता कालिन थे,
अशोक कुमार व नलिनी जयवंत भी
इस फ़िल्म की मुख्य भूमिका में थे।
इस फ़िल्म का उल्लेख इसलिये है
कि स्पष्ट हो सके कि आज़ादी के
बाद हम लंबे समय तक किस तरह
सुभाष बाबू को मिस करते रहे हैं।
यह मिस करना उनके व्यक्तित्व
के कारण है, जो कुछ ऐसे आदर्श
मूल्यों से समृद्ध हुआ था, जो नितांत
असामान्य भी है और दुर्लभ भी है।
ऐसा कैसे हुआ कि रेडियो से गूँजा
यह संबोधन ‘मैं सुभाष बोल रहा हूँ’
हमारे देश भारतवर्ष के नव युवाओं
के हृदय से कभी नहीं जुड़ सका।
यदि अपदस्थ होती हिंसा को देख
हमारा एकांत सुरक्षित महसूस है,
आदित्य तभी व्यापक अर्थ में हमारी
नेताजी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ



