साहित्य

वाणी वंदन

डॉ॰ अर्जुन गुप्ता 'गुंजन'

करदो कृपा माँ भारती।
तेरी उतारें आरती॥

दे दो दया का दान तुम।
भरदो सभी शुचि ज्ञान तुम॥
सब पर दया तू धारती।
करदो कृपा माँ भारती॥

वर दो सदा गुणधर्म का।
उपकर्म का सत्कर्म का॥
बिल्कुल नहीं तू हारती।
करदो कृपा माँ भारती॥

वागेश्वरी परमेश्वरी।
वर दो सदा ब्रह्मेश्वरी॥
दुश्मन सदा संहारती।
करदो कृपा माँ भारती॥

शुभकर्म हो शुभधर्म हो।
ऐसा ही सबका मर्म हो॥
खुशियाँ सभी पर वारती।
करदो कृपा माँ भारती॥

परमार्थ बस ही जी सकूँ।
सबके लिये कुछ कर सकूँ॥
बन जाऊँ मैं महारती।
करदो कृपा माँ भारती॥

डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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