
हम समय की धड़कन हैं, हम चाल बदल देंगे,
विदा वर्ष के संग हर जंजाल बदल देंगे।
जो खामोश पड़े थे सपनों के श्मशान में,
विश्वास की गर्जन से हर ख्याल बदल देंगे।
निराशा की गलियों में जो दीप थके-हारे,
आशा की ज्वाला से हर मशाल बदल देंगे।
जो कल तक बोझिल थे पग-पग पर कांटे बन,
हम सीख बनाकर उनका हर हाल बदल देंगे।
हारों की बोली में भी हुंकार भरेंगे हम,
टूटे मनों का भी संबल-ताल बदल देंगे।
नववर्ष ललकारे,“अब उजालों को थामो”,
हम सोच बदल देंगे, हर जाल बदल देंगे।
आओ संकल्पों की लिखें भविष्य-गाथा,
पहले खुद को गढ़ेंगे, फिर समाज बदल देंगे।
*दिनेश पाल सिंह दिलकश*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*




