
नव वर्ष आया द्वार हमारे,
आशा के दीप जला गया।
बीते पल सब सीख बनें अब,
नव सपनों का साज सजा गया॥
टूटे मन के तार जोड़कर,
विश्वासों की धुन रच जाए,
मेहनत, सत्य, स्नेह का पथ
हर जीवन में उजियारा लाए।
छूटें भय, छूटें संशय,
हौसलों को पंख लगा गया॥
नव वर्ष आया द्वार हमारे…
सहज हँसी, सरल अभिवादन,
मन-मन में विश्वास जगे,
भूले द्वेष, गले लगाएँ,
मानवता हर श्वास सगे।
साझा सुख-दुख, एक दिशा में,
चलने का संदेश सुना गया॥
नव वर्ष आया द्वार हमारे…
नव संकल्प की शपथ लिए हम,
कर्म पथ पर दृढ़ हो जाएँ,
छोटी-छोटी जीत समेटें,
बड़े सपनों तक पहुँच जाएँ।
समय की धारा में बहकर,
नव भविष्य का राग रचा गया॥
नव वर्ष आया द्वार हमारे…
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




