
पूर्ण हुआ फिर एक अध्याय
अब है रचना नया अध्याय
नव उमंग उत्साह की कलम से
नव सृजन कर रचें यह अध्याय
जाते-जाते कुछ कहते हैं लम्हे
दुःख भूल जा कहते हैं लम्हे
सुख की स्मृतियां संवार कर
सहेज कर रखो कहते हैं लम्हे
न शिकवा न गिला न भूल दोहराना
नम पलकें नहीं हंसी होठों पे सजाना
बीते साल के नए सबक सीख कर
अपने आंचल को फूलों से सजाना
चहुंओर फैले यश कीर्ति आपकी
दमन में हों सदा खुशियां आपकी
ऐसी है नव वर्ष मंगल शुभेच्छा
खिलें कलियां होठों पर आपकी
जश्न मनाएं सभी नव वर्ष का
अब जमाना आया रील्स का
हरओर धूम मची है बधाइयों की
अभिनंदन दो हजार छब्बीस का
लक्ष्मी सिंह
जलालाबाद शाहजहांपुर



