
बड़ी अजीब जिंदगी है साहब , अहसास के तले जीना , यादों को समेटे रहना जीना सचमुच बहुत मुश्किल होता हैं, आज के समय जब मानवीयता हाशिए पर है संदेवना लुप्त हो रही हैं फिर हम कितने ही संवेदनशील ,भावुकता हो
पर आज की भाग दौड़ की, सैकड़ों किरदार को किसी पर विश्वास न कर खुद करते हुए इतने थक से जाती हैं कि जिंदगी में बिल्कुल हर रोज़ जीते जी मर रहे सा अहसास बना रहते हैं इस जिते जी मर रहे अहसास को दिल और दिमाग से निकाल सक्रिय रखें ऊर्जा और ताकत समेटे कुछ कर गुजरने का , कुछ सार्थक सृजन लिए देश और समाज को देने का जुनून रखना है तो हर रोज़ किसी गाड़ी में पेट्रोल खत्म हो जाना पर पेट्रोल पंप दस्तक देना पड़ती हैं ठीक उसी तरह हर रोज रोज़ समय निकाल कर उन चंद पलों को ताज़ा रखने के लिए उन चंद स्थानों पर दस्तक देना पड़ती हैं जहां कभी कोई रिश्ता दोस्ती का अपनेपन का ख्याल और चिन्ता का नसीब हुआ था जो हमने दोनों ने और के सुख सुकून के लिए न चाहते हुए भी त्याग दिया था
खैर साहब प्रतिदिन ईश्वरीय शक्ति ईश्वर उपहार से आशीष नसीब होते उस ईश्वर स्थानों पर उपलब्ध सुख सुकून और उर्जा के लिए जाना का समय निकाल कर जाना होता हैं
तब चंद पलों में जितना अधिक से अधिक सुख सुकून मिलता हैं समेटे के वापस घर में अपने जीवन के सालों से चल रहे किरदार को ईमानदारी से निभाना है फिर कितना ही कुछ कोई हमें बोले
सब कुछ सहन करते हुए उन्हीं की जिंदगी के सुख सुकून के लिए जीना है क्या करें ईश्वर ने कुछ देवताओं को एजे भी धरा पर रख रखे हैं ताकि दुनिया सुख सुकून से जीते हुए चले यह सब जब तक चलेगा संवेदना , दिया और अपनेपन का ख्याल अहसास नहीं पता राम जाने साहब
बस इतना जानता हूं कि मुझे अभी खत्म हुआ जा रहा सुख सुकून का अहसास रूह का आशीष प्यार दुलार आदर और सम्मान के साथ अपनेपन को समेटे के लिए जाता है और में अपनी कथा समाप्त करता हूं समय निकाल जा रहा है बहुत मुश्किल से यह अहसास का सुखद सुख सुकून मिलता है जिंदा रहना है तो अति आवश्यक हैं यह सुख सुकून और में चल देता हूं जीवन उर्जा और ताकत के लिए उन स्थल पर जहां जीवन को सुकून मिले और
जीवन की गाड़ी फिर अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए सतत् चले
बाकी सब राम जाने
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




