
मंगल की बेला आई,
खुशियाँ अपार लाई,
मिटे सब शोक-पीर,
नव बिहान हो।
छोड़ो सब बैर-भाव,
प्रीति का जगाओ चाव,
भारत की भूमि पर,
गूँजता विहान हो।।
छब्बीस का साल यह,
उन्नति की राह गहे,
स्वर्णमयी कांति लिए,
सुख का विधान हो।
सत्य और न्याय चले,
प्रेम के सुमन खिले,
मानवता ऊँची रहे,
जग में सम्मान हो।।
॥ नव-संकल्प: 2026 ॥
नव चेतना का उदय
मंगल की भोर भई,
छब्बीस की कोर नई,
किरणें सुनहरी खिलीं,
हर्षित जहान है।
बीती बातें भूल जाओ,
नूतन उमंग लाओ,
कर्म की डगर पर,
बढ़ता किसान है।।
ज्ञान का प्रकाश फैले,
द्वेष का न लेश रहे,
सत्य की मशाल लिए,
युवा शक्ति महान है।
भारत की माटी चूमे,
विजय का व्योम घूमे,
नवल वर्ष में गूँजता,
भारत का गान है।।
प्रगति और सौहार्द
उन्नति की राह गहे,
सुख की सरिता बहे,
हर एक द्वार पर,
वैभव की शान हो।
मिटे सब भेदमय,
जीत लेवे विश्व-हृदय,
मानवता के मंदिर में,
ऊँचा सम्मान हो।।
स्वच्छ रहे नीर-नभ,
पावन समीर बहे,
प्रकृति की गोद में ही
, बसता प्रान है।
कदम मिला के चलो,
दीप खुशियों के मलो
, वर्ष छब्बीस बना,
खुशियों की खान है।।
सत्येन्द्र कुमार पाठक
करपी , अरवल , बिहार 804419
9472987401




