
प्रारंभी नेह
आ गया साल नया सत्कार कीजिए।
बढ़ के खुद से प्यार का इजहार कीजिए। ।
नेह – 1
होती है नयी सुबह रोज रात की ।
ये नियम प्रकृति का स्वीकार कीजिए।
नेह–2
जिन्दगी में क्या मिला, क्या मिला नहीं ।
भूल कर बात ये आगे का विचार कीजिए ।
नेह–3
कब रुकी है जिन्दगी? जानते सभी।
खुद की जिंदगी से खुद प्यार कीजिए।
नेह—4
मिलते हैं ढ़ूँढ़ने से सब को रास्ते कई ।
भूल चूक जो हुई अब सुधार कीजिए।
नेह–6 परिचय नेह
कितनी सीख दे गया साल जो गया।
नये साल के लिए प्रभु से ‘मनु’हार कीजिए ।।
मंजुला शरण ‘मनु’
राँची, झारखण्ड़।




