प्रयागराज के उभरते व्यंग्यकार जयचन्द प्रजापति: सामाजिक विसंगतियों पर सरल भाषा में करारा प्रहार

प्रयागराज, 25 जनवरी 2026: दि ग्राम टूडे
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की हंडिया तहसील के जैतापुर गाँव में जुलाई 1984 में जन्मे जयचन्द प्रजापति ‘जय’ हिंदी साहित्य जगत में अपनी सरल, बोलचाल की भाषा में सामाजिक विसंगतियों पर तीखे व्यंग्यों के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
कविता, लघु कहानी, हास्य-व्यंग्य और लेखन जैसी विधाओं में सक्रिय इस समकालीन रचनाकार की रचनाएँ समाचार पत्रों, साहित्यिक पत्रिकाओं तथा सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से पढ़ी और सराही जाती हैं।
उनकी प्रमुख व्यंग्य रचनाओं में “दहेज के लिये सुर बदला”, “खोदा पहाड़ निकली चुहिया”, “खटमल और भ्रष्टाचार” तथा “चमचा की चमचई” शामिल हैं, जो समाज की गहरी सच्चाइयों को हास्य के आईने में उजागर करती हैं।सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनके करारे व्यंग्यों ने प्रयागराज के साहित्यिक मंचों पर खासी धूम मचा रखी है। विभिन्न साहित्यिक आयोजनों में उन्हें ‘श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान’ से नवाजा जा चुका है।
अभी तक उनकी कोई पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है, किंतु भविष्य में संग्रह प्रकाशन की योजना पर वे कार्यरत हैं। सोशल मीडिया पर उनकी रचनाओं को अधिक संख्या में पढ़ा जाता है, जो उन्हें एक उभरते और प्रभावशाली व्यंग्यकार के रूप में स्थापित कर रहा है.




