राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव में आठ प्रदेशों से आए 137 कवि और कवयित्रियों ने किया काव्य पाठ
रविवार सुबह 8:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक कुल 16 घंटे चला महोत्सव

सम्भल स्थित डी के रिसोर्ट में आयोजित राष्ट्रीय काव्य संगम महोत्सव में आठ राज्यों से आए साहित्यकरों ने, प्रातः छह बजे से देर रात्रि तक निरंतर सोलह घंटे कविता पाठ करके, साहित्यिक कार्यक्रम को ऐतिहासिक समारोह के रूप में मनाया गया। श्री कल्कि देव तीर्थ समिति की प्रेरणा से यह कार्यक्रम हिन्दू जागृति मंच के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय डी के शर्मा की स्मृति में आयोजित किया गया था।

जिसमें सत्र के अध्यक्ष के रूप में उपस्थित उपजिलाधिकारी रामानुज ने साहित्य को वह धरोहर बताया जो अगली पीढी को संस्कारित बनाती है,एवं साहित्यिक अभिरुचि हमेशा ही हमारे मन-मस्तिष्क को तरोताजा बनाए रखती है। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी महोदय ने हिन्दू जागृति मंच के सदस्यों एवं उपस्थित साहित्यकारों को भगवान श्री कल्कि का चित्र एवं श्रीमदभागवद गीता ग्रन्थ एवं स्पर्शी पत्रिका देकर सम्मानित किया।
नगर हिंदू सभा के अध्यक्ष कमलकांत तिवारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक आयोजन बताया क्योंकि एक साथ 137 साहित्यकारों को एकत्र करके और इतने लंबे समय तक अखंड कार्यक्रम चलाना, वास्तव में साहित्य के इतिहास में एक अनूठा कार्यक्रम है। इसके लिए हिन्दू जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा को बधाई दी।
हिंदू जागृति महिला मंच की प्रदेश अध्यक्ष नेहा मलय ने कहा कि आठ प्रदेशों से आए 137 साहित्यकारों ने रविवार प्रातः काल 8:00 बजे से निरंतर 16 घंटे तक कार्यक्रम चलकर रात्रि 12:00 बजे संपन्न हुआ। ऐसा अद्भुत अनूठा और मिसाल बनने वाला कार्यक्रम हिंदू जागृति मंच ने करके साहित्य जगत में संभल की यश पताका बुलंद की है। अतुल कुमार शर्मा ने कहा कि हमारा संगठन प्रतिवर्ष ही ऐसा आयोजन निरंतर चार वर्षो से कराता आ रहा है, साहित्यकारों का सम्मान करना हमारे लिए गौरव की बात है।
इह अवसर पर रामपुर से आए गीतकवि शिवकुमार चंदन सुनाया- आज समय की मांँग यही है, मातृभूमि यशगान करो। निज संस्कृति संरक्षण हित, मिलकर कर्म महान करो।।डॉ संदीप कुमार सचेत ने पढा- दुख ने पाया विस्तार और सुख सिमट गया, खुद को सहेजने में, मैं खुद ही मिट गया।।
गीता सार को समेटे हुए दीपक गोस्वामी चिराग ने सुनाया- जो बीता अच्छा हुआ, जो भी होगा श्रेष्ठ। घटित हो रहा जो अभी, वह भी है अतिश्रेष्ठ।।
श्रीपाल शर्मा ईदरीशपुरी द्वारा लाइन प्रस्तुत की गईं –
हंँसती-इठलाती जहांँ पर हैं कलियाँ, वहीं पर मैं अपना चमन देखता हूंँ। जहांँ पर है बहता प्रेमरस धरा पर, वहीं पर मैं अपना वतन देखता हूंँ।
सुखपाल सिंह गौर ने सुनाया कि- मुझे तो प्रेम है इस देश के साहित्य से यारो, कविताएंँ मिट नहीं सकतीं और मैं मर नहीं सकता।
तीर्थ देव शर्मा सरल,श्रीपाल शर्मा ईदरीशपुरी, उज्ज्वल वशिष्ठ, ईशांत शर्मा ईशू, आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ एवं ज्ञानप्रकाश उपाध्याय ने संचालन एवं व्यवस्थाओं की कमान संभाली।
इस अवसर पर अनन्त कुमार अग्रवाल,नेहा मलय, संतोष गुप्ता, अनुराग गुप्ता, संजीव कुमार सारस्वत, अजय गुप्ता सर्राफ, निशिकांत तिवारी, अरविन्द गुप्ता, चरन सिंह भारती, पूनम शुक्ला, नवरत्न वार्ष्णेय, सुमंत शुक्ला,दिनेश कुमार जाटव, रंजीत कुमार, अरुण अग्रवाल, सुबोध कुमार पाल, नवनीत कुमार, निखिल शर्मा, अमन सिंह, अमित शुक्ला आदि लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुखपाल सिंह गौर, इशांत शर्मा यीशु, अतुल कुमार शर्मा, सुबोध कुमार गुप्ता एवं मीनू रस्तोगी ने संयुक्त रूप से किया।




