साहित्य

रूक जाना नहीं

सुमन बिष्ट

 

हार जाना गलत नहीं,
यह तो जीवन का एक रंग है,
पर हार मान लेना गलत है,
यह जीने का गलत ढंग है।

जो गिरकर भी उठ खड़ा हो,
वही सच्चा वीर कहलाए,
टूटे सपनों की राख इकट्ठा कर,
फिर इक नया विश्वास जगाए।

काली अंधेरी रातें बताती हैं,
उजाले का क्या है मोल,
सन्नाटे में भी सुनाई देते है,
उम्मीदों के साहसी बोल।

रुक गये तो मंज़िल तक,
पहुँचने से पहले हार जाओगे
हिम्मत से यूँ ही चलते रहे,
तो मंज़िल को पा जाओगे।

जिंदगी में हर ठोकर एक सबक है,
और हर आँसू एक पाठ,
इन्हीं से बनती है जीवन की,
इक मजबूत सी बुनियाद।

जो सपना अधूरा रह गया था,
वो पूरा हो सकता है,
हर टूटा हुआ हौसला भी,
फिर से जुड़ सकता है।

हार को पूर्ण-विराम मत समझो,
यह नहीं है अंत,
यहीं से तो शुरू होते हैं,
फिर से नित नये संघर्ष।

हर अंत में छुपी होती है,
भविष्य की एक नई शुरुआत,
बस विश्वास को थामे रखना,
और न छोड़ना साथ।

सुमन बिष्ट, नोएडा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!