
दुआ यही मेरे परवरदिगार ईद के दिन।
वतन के लोगों में हो गहरा प्यार ईद के दिन।
ख़िज़ाओं का न असर हो कभी गुलाबों पर,
चमन में खुद चली आए बहार ईद के दिन।
सताए याद मेरी यार तो चले आना,
रहेगा मुझको तेरा इन्तिज़ार ईद के दिन।
बहा न आँख से आँसू का कोई भी कतरा तुम,
लगेगा हमको बहुत नागवार ईद के दिन।
हमारे घर में सुखोचैन आज है *अम्बुज*,
कोई तो जागा है रातें हजार ईद के दिन।
चनरेज राम अम्बुज




