साहित्य

ग़ज़ल

चनरेज राम अम्बुज

दुआ यही मेरे परवरदिगार ईद के दिन।
वतन के लोगों में हो गहरा प्यार ईद के दिन।

ख़िज़ाओं का न असर हो कभी गुलाबों पर,
चमन में खुद चली आए बहार ईद के दिन।

सताए याद मेरी यार तो चले आना,
रहेगा मुझको तेरा इन्तिज़ार ईद के दिन।

बहा न आँख से आँसू का कोई भी कतरा तुम,
लगेगा हमको बहुत नागवार ईद के दिन।

हमारे घर में सुखोचैन आज है *अम्बुज*,
कोई तो जागा है रातें हजार ईद के दिन।

चनरेज राम अम्बुज

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