
खट पट करते वो नन्ही से बटन
हजारों बातें लिख जाते थे
हम मन कहते उनसे
वो उंगलियों पर नाचते थे
समेटे वो शब्दों का भंडार खुद में
आपस में चिपक जाते थे
वो नन्हे से बटन
जाने क्या क्या लिख जाते थे
खट खट पट पट खटपट
बीत गया वो जमाना
आवाज़ सुनाई नहीं देती
वो उंगलियों के दबाने से
सुईयां उठाई नहीं देती
खटपट से निकलती सरगम
कानों में नहीं गूंजती
हाय ,,,,,,वो टाइपराइटर
वो छोटा सा डिब्बा
अब दिखाई नहीं देता
खट खट पट पट
खट खट पट
प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




