साहित्य

वंदे मातरम

मधु वशिष्ठ

वंदे मातरम्, हे भारतवर्ष तुझे नमन।
आज गणतंत्र दिवस है आओ हम करें उन वीरों को स्मरण।

अंग्रेज व्यापारी बनकर आए,
लूटी संपदा हमें अपने ही देश में गुलाम किया।
हमारे हर संसाधन पर अधिकार जमा कर,
हमें तिल तिल मरने को लाचार किया।
लेकिन थे कुछ देश प्रेमी जिन्होंने देश को आजाद कराने का विचार किया।

अंग्रेजों से लोहा लेने को
खुद का भी बलिदान किया।
एक लक्ष्य आजादी का लेकर।
फांसी के फंदे पर झूलना भी स्वीकार किया।
मातृभूमि की रक्षा करने
घर को अपने भुला दिया।

जय भारत मां के उद्घोष से
हर हृदय में उन्होंने वीरता का संचार किया।
देश प्रेम का लावा फूटा।
सामर्थ्यानुसार देशवासी प्रत्येक लड़ा।
वंदे मातरम का गूंजते नारे ने,
गलियों तक में शोर किया।

उनके इन बलिदानों के कारण ही,
अंग्रेज भारत छोड़ने को मजबूर हुआ।
आज के बच्चों भूल ना जाना।
वंदे मातरम ही है हमारा तराना।
आज समय की मांग यही है
अपने देश की सुरक्षा, संस्कार और विकास की खातिर ही तुम देश के लिए ही जी जान लगाना।

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा।

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