
एक थे वीर सन्यासी विवेकानंद
जिसने सोया भारत पुनः जगाया
ऊंचे कुल में जन्में
फिर भी हुआ नहीं अभिमान
सन्यासी बन जीवन पूर्ण गुजारा
एकाग्रता, धैर्य और संयम का
पाठ जिसने पढाया
वो ही थे वीर सन्यासी विवेकानंद
विशाल ह्रदय, बालिष्ठ गर्वीला वाले
अन्याय, अनीति के थे विरोधक
इनकी प्रतिमा का पूरी दुनिया ने लोहा माना
समूचा प्रकृति जिसका करता वंदन
वे ही थे आत्मज्ञानी महापुरुष विवेकानंद
जिसने हमें सिखाया
इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं
करों संघर्ष लक्ष्य पाने को
सोच बदली जिसने दुनिया की
सत्य सनातन धर्म का जिसने लोहा मनवाया
देश प्रेम और निःस्वार्थ सेवा
जिसने हमे सिखाया
है नमन तुम्हें बार बार हे पुण्य आत्मा
है जन जन की अभिलाषा वीर सन्यासी
तुम फिर से मानव रूप में आ जाओं
भारत को अपना विश्वगुरु बना जाओं
नवनीत कुमार, मोतिहारी (बिहार)




