साहित्य

विश्वास

रश्मि मृदुलिका

 

विश्वास की डोरी जितनी नाजुक,
उतनी ही मजबूत होती है,
विश्वास हो साथ,तब जुड़ता है कोई,
अपमानित हो भाव, तब छूटता है कोई,
सागर स्वयं से अथाह नहीं हुआ जनाब,
गहराइयों में लहरों सा बहता है कोई,
आकाश तक पहुंची तरु शाखाएँ,
जड़ों के विश्वास के सहारे उठते हैं,
बाती से जलती लौ तेल के भरोसे,
निशा भर अंधेरे का आभास नहीं होने देती,
विश्वास से चलती दुनिया की सांसें,
आज और कल के बीच बहते वक्त के धारे,
वक्त के नहीं रिश्ते विश्वास की है धुरी ,
इसलिए संभाले रखना विश्वास की पूंजी,

रश्मि मृदुलिका
देहरादून उत्तराखंड

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