
“”गंगा जल पी लेने से,
यदि मीटती भूख हमारी,
मस्जिद में मंदिर बनवादो,
लेकर पैसा सरकारी।
कन्या का धन लेने से,
यदि मैं अमीर बन जाऊं,
बेटी दर्ज़न भर पैदा कर,
लखपत्ति कहलाऊं।
बड़े कर रहे इसक उसक जब मैं गूंगा बन जाऊं,
ले कर दोनों हाथ लुआठी,
शव को आग लगाऊं।
भारत माता का बेटा मैं,
इसी लिए कंगाली है,
बुद्धि पेट से कहती है,
डिग्री मेरी जाली है —-बुद्धि पेट से कहती है डिग्री मेरी जाली।। 😭😭
डॉ नवीन मौर्या “फायर बनारसी “हास्य व्यंग कवि, काशी।




