
उग्र हुआ था पाक ज्यों , रोए बूढ़े बाल।
दोष रहित मनु देखते ,सिर पर अपने काल।
गूँजा फिर चित्कार से, धरणी का इक छोर,
शरण लिए फिर हिन्द में ,संकट को दे टाल।।
शरणार्थी की हर मदद, करता हिंदुस्तान।
सेना के सहयोग से, बना लिया पहचान।
दम तोड़ा अन्याय ने, गढा नया अध्याय,
विश्व पटल पर छा गया, भारत देश महान।।
जीत लिया हर जंग को, सेना वीर जवान।
अविचल साहस से भरें ,बढ़ते सीना तान।
रोक -सका कोई नहीं,
हैं भारत के लाल।
हारा हर बार अरि, जाने देश जहान।।।
बिना -डिगे सैनिक लड़े, बँधा दिये यूँ आस।
पांँव तले रिपु रौंद कर, तोड़ा अरि का श्वास।
गर्जन करके सिंह सम, करते रहे प्रहार,
सैन्य -शक्ति को भाँप अरि,भटका कब फिर पास।।
किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर




