साहित्य

ये मौसम सुहाना हो गया

कुलदीप सिंह रुहेला

ये मौसम बारिश का सुहाना हो गया,
तेरे ख्यालों से दिल आशियाना हो गया।
जब से तेरा नाम धड़कनों ने लिया,
हर पल मेरा बस दीवाना हो गया।

भीगी पलकों पे सपने उतर आए हैं,
हवा का हर झोंका शरमाना हो गया।
तेरी हँसी की धुन में भीगता हूँ,
सावन भी आज इश्क़ का बहाना हो गया।

छत पे टपकती बूंदें गिनते-गिनते,
वक़्त भी ठहर कर मुस्काना हो गया।
तेरे हाथों की गर्मी याद आते ही,
बरसात का हर लम्हा दीवाना हो गया।

न चाँद चाहिए, न तारे अब मुझको,
तेरा साथ ही मेरा ज़माना हो गया।
तू पास हो या सिर्फ़ एहसास में,
मेरा हर मौसम प्यार का तराना हो गया।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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