
ये प्यार की बातें, मैं और तुम,
खामोशी बोले, मैं और तुम।
सांझ की चादर, तारों की धुन,
दिल की गलियों में, मैं और तुम।
हवा भी ठहर कर सुनने लगे,
जब नाम तुम्हारा, होंठों पे आए।
हर धड़कन एक तराना बने,
जब आँखों में सपने मुस्काए।
चाय की भाप में किस्से पुराने,
हँसी के मोती, मैं और तुम।
बारिश की बूंदें ताली बजाएँ,
भीगें लम्हे, मैं और तुम।
रातों की नींदें थोड़ी सी रूठें,
ख़्वाबों में बातें, मैं और तुम।
हर मोड़ पे साथ चलें यूँ ही,
बिन कहे वादे, मैं और तुम।
ना ऊँची बातें, ना बड़े दावे,
बस सच्चा सा दिल, मैं और तुम।
इस सादगी में ही तो बसता है,
पूरा सा प्यार—मैं और तुम।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




