
ज़माना
ज़माना तो आगे बढ़ता ही है
हम कहीं पीछे छूट जाते है!!
तन्हाई के साथ जीना नहीं आया
सुना है लोग रूठ जाते हैं!!
वक़्त की पाबंदियां है वर्ना
बहाने सबको मिल जाते हैं!!
किसी को मिलते हैं बहुत मौके
तो कोई रास्तों में छूट जाते हैं!!
मुकम्मल इंसान कभी होता ही नहीं
हम दिल की कमियां कहांँ ढूंढ पाते हैं!!
वादा वफ़ा नहीं होता किसी का
लोग वादा करके मुकर जाते हैं!!
रिश्तो में चारों ओर दीवार सी रहती है
निभाने जाते हैं एक छोर तो,
दूसरे छोर में उलझ जाते हैं!!
इंतज़ार में वक्त गुजरता है तो कभी
इंतज़ार करना ही भूल जाते हैं!!
ज्यों ज्यों जो उम्र बीतती जाती है
सपने हकीकत बनते बनते,
टूट जाते हैं…..
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




