साहित्य
आईना

दिल को ना जाने क्या
बना रखा है
कहीं सूरत बनाई
जा रही है
कहीं आईना दिखाया
जा रहा है!!
अब तो ज़िन्दगी बड़ी
पेचीदा है
दिल आख़िर दिल है
कोई समझा रहा है!!
वादा वफ़ा की किताबी
बातें हैं
यह पाठ किसे पढ़ाया
जा रहा है!!
साथ रहकर भी नहीं है
साथ उनका
रिश्ता दोस्ती का बताया
जा रहा है!!
फ़िक्र में जागते रहते हैं
हम तो
क्यों आप पर इल्ज़ाम
लगाया जा रहा है…
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




