
जुबां पर है बस एक बात,
अगर तुम साथ हो तो फिर
चिंता की क्या होगी बात!
निर्द्वन्द्व, निर्भीक, बहती रहूँगी,
अविरल रसपान करती रहूँगी।
जो मधुर स्नेह- निर्झर बहा है, भक्ति रस का सागर मिला है।
हर निधि तो तेरे चरणों में बसी है।
रफ्ता रफ्ता तो मैं बह चली हूँ,
कर्मभाव लेकर चली हूँ,
जीवन-नदी में तुझ संग ढली हूँ।
तुम तो पुष्प मैं इक कली हूँ।
तुम साथ हो तो किस बात की कमी है?
– सुषमा श्रीवास्तव,रुद्रपुर ,उत्तराखंड।




