साहित्य

बार बार

प्रिया काम्बोज प्रिया

एक इल्तज़ा
तुझे मैं बार बार करता हूं
है मोहब्बत
तुझसे मैं ऐलान करता हूं
ना बन
इतना बेरहम ए मेरे सनम
दर्द लेकर
दवा भी तुझसे मांगा करता हूं
धड़कनों को मेरी
तू पहचानती है ए मेरे सनम
एक बार
जो मिले सुकून रुह को मेरी
ये दरख्वास्त
मैं बार-बार करता हूं
मेरा दर्द
भी तू दवा भी तू
बस ये
ही पुकार मैं बार-बार करता हूं

प्रिया काम्बोज प्रिया ✍🏻 सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!