
सन सोलह सौ तीस में,जन्मा वीर महान।
छत्रपति इस नाम से , है उनका सम्मान।।
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शाह राव के पुत्र थे ,राजा सिंह समान।
जीजाबाई मात थीं , वीरांगना महान।।

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बाल्यकाल से जीतते,खेल में दुर्ग अनेक।
दर्शाते थे बस यही , पूत पालने देख।।
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गोरिल्ला की नीति से , लड़ीं अनेकों जंग।
अफजलखां को मार की आदिलशाही भंग।।
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रामदास गुरु श्रेष्ठ थे ,छत्रपति मिले शिष्य।
शूरवीर ने देश का , उज्वल किया भविष्य।।
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वीर शिवाजी मरहठा,देश की हैं पहचान।
उनके पावन नाम को , गाये हिन्दुस्तान।।
— आशा बिसारिया चंदौसी




