साहित्य

एस के कपूर”श्री हंस”

वह सबके दिल में बसते जो मीठा बोल लेते हैं

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वह सबके दिल में बसते जो मीठा बोल लेते हैं।
सब उनको ही चाहते जो कानों में मिश्री घोल देते हैं।।
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जो बातें स्नेह मिलन प्यार संस्कार की करते हैं।
बनते धरोहर समाज की जो सब को लेकर चलते हैं।।
वही रहते सुखी जो छोटी-छोटी खुशियां बटोर लेते हैं।
वह सबके दिल में बसते जो मीठा बोल लेते हैं।।
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कब बोलना कब चुप रहना जो यह समझ रखते हैं।
जो केवल धैर्य विवेक – बुद्धि से ही बात करते हैं।।
वह लहरों के विपरीत भीअपनी नाव को खे लेते हैं।
वह सबके दिल में बसते जो मीठा बोल लेते हैं।।
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जो अकड़ से दूर दिलों पर पकड़ को रखते हैं।
नहीं दोष देते किसी को जब कोई गलती करते हैं।।
जब किसी की मुश्किल में दिल अपना खोल देते हैं।
वो सबके दिल में बसते जो मीठा बोल लेते हैं।।
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जो हर बात में सहयोग मानवता को ऊपर रखते हैं।
जो केवल सद्भावनाऔर सहयोग की ही बात करते हैं।।
जो हर बात में स्वार्थ भावना को बस दूर ही रखते हैं।
वह सबके दिल में बसते जो मीठा बोल लेते हैं।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।

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