
खुद ही खुद में रहने दो
थोड़ा – बहुत विचरने दो
लोग कहां पहचानेंगे,
चेहरा उसको रंगने दो।
खुशबू जिसमें बसती है,
उसको जरा महकने दो।
सूरज चांद सितारों से,
दुनिया को कुछ कहने दो।
सच तो मारा जायेगा ही,
झूठों को तुम लड़ने दो।
जाना बहुत जरूरी क्या,
मुमकिन हो तो रहने दो।
पूरी एक नदी मुझमें,
बहती है तो बहने दो।
जीवन की ऐसी गतिविधि,
उसको पार उतरने दो।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890




